"लम्हों ने ख़ता की थी,सदियों ने सज़ा पायी।"
-रश्मि घटवाई
अपनेही पैरोंपर कुल्हाड़ी मारना क्या होता है,यह कोई कांग्रेस से सीखें।अपने दस वर्ष के कार्यकाल में कांग्रेस प्रणित यूपीए सरकार ने भ्रष्टाचार और घोटालों के सिवाय देश को कुछ भी नहीं दिया है।कहा जा रहा है,कि यूपीए के शासन काल में करीब साढ़े पाँच हजार लाख करोड़ रुपयोंका घोटाला हुआ है।कोई और होता,तो इस स्वर्णिम मौके का फायदा उठाकर दस साल इतना अच्छा शासन-प्रशासन देता,कि आनेवाली पीढ़ियाँ उन्हें याद रखतीं।इतिहास उस कार्यकाल की प्रशंसा करता।और तो और; जनता उन्हें बार बार सत्ता में लाना चाहतीं।लेकिन अब जनता अभूतपूर्व भ्रष्टाचार व घोटालों के कारण यूपीए सरकार को, उनके दस वर्ष के कार्यकाल को और कांग्रेस को हमेशा याद करती रहेगी।
हाल ही में प्रकाशित दो पुस्तकों ने कांग्रेसप्रणित यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार व घोटालों को उजागर किया है। जनता को जिसकी पहलेसे ही आशंका थी ,वह सत्य सामने लाया है। "द अॅक्सिडेन्टल प्राईम मिनिस्टर" संजय बारू लिखित पुस्तक में तो प्रधानमंत्री ने सत्ता का केन्द्र सोनिया गांधी होने की बात को स्वयं स्वीकार किया हुआ बताया है ।संजय बारू यूपीए-१ में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के मीडिया अॅडव्हायजर-अर्थात मीडिया सलाहकार थे।"क्रूसेडर ऑर कॉन्स्पिरेटर ?कोलगेट अॅण्ड द अदर ट्रूथस" इस दूसरी पुस्तक में कोयला मंत्रालय के सेवानिवृत्त सचिव पी सी पारख ने पूरे कोयला घोटाले का सच लोगों के सामने लाते हुए बताया है कि १. ८६ लाख करोड़ रुपये का कोयला घोटाला आखिर कैसे हुआ।ऐन चुनावोंके दौर में इन पुस्तकोंने कांग्रेस प्रणित यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार व घोटालों को जनता के सामने रखा है,जिसके कारण कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गयी है। सर्वे रिपोर्ट पहलेसे ही निर्देश दे रहे हैं कि इन चुनावोंमें कांग्रेस की ऐतिहासिक हार होगी।
"धिस बुक विल हेल्प रीडर्स अंडरस्टॅण्ड द कॉम्प्लेक्स रिलेशनशिप बिटवीन द पीएम अॅण्ड द पार्टी प्रेसिडेन्ट" "द अॅक्सिडेन्टल प्राईम मिनिस्टर" पुस्तक में संजय बारू लिखते हैं।
"इन यूपीए-१,ही( डॉ.मनमोहन सिंह)वॉज इन ऑफिस,बट ही वॉज नॉट इन पॉवर... डॉ.सिंह वुड हॅव बीन वेल अवेअर ऑफ द लिमिटस् टू द प्राईम मिनिस्टरियल अथॉरिटी अंडर सच अ डिस्पेन्सेशन. ही सॉ हिमसेल्फ अॅज द अॅक्सिडेन्टल प्राईम मिनिस्टर… काँग्रेस'स् अलाईज (allies)इन यूपीए-१ नॉमिनेटेड देअर ओन मिनिस्टर्स अॅण्ड बार्गेन्ड फॉर देअर पोर्टफोलियोज विथ सोनिया ,नॉट विथ डॉ.सिंह ..अॅज फॉर सिनियर काँग्रेस लीडर्स,दे ओवड् देअर कॅबिनेट पोस्टस् ऑलमोस्ट एन्टायरली टू सोनिया गांधी …व्हेन द कौन्सिल ऑफ मिनिस्टर्स वॉज रीशफल्ड ड्युरिंग द टर्म ऑफ यूपीए-१, डॉ.सिंह डिड हॅव मोअर ऑफ अ से ,बट ईव्हन सो,फ्यू ऑफ इटस् मेम्बर्स एव्हर बिहेवड् अॅज इफ दे ओवड् देअर मिनिस्टरियल पोझिशनस् टू पीएम."बारू लिखते हैं।
सभी कांग्रेसी नेताओं की ईमानदारी प्राईम मिनिस्टर की बजाय सोनिया गांधी के प्रति समर्पित थी ,इसका वे विस्तार से नामों समेत खुलासा करते हैं।
"पृथ्वीराज चव्हाण वॉज डॉ.सिंह'ज् प्रोटेजी(
"व्हॉट शुड डॉ.सिंह'ज् स्ट्रैटेजी बी ?शुड ही अझ्युम दॅट व्हाईल सोनिया वॉज द लीडर ऑफ द काँग्रेस ,ही वॉज द हेड ऑफ अ कोअलिशन गव्हर्नमेन्ट ,विथ नॉन - काँग्रेस कॉन्स्टिट्यूएन्ट्स ,इन्क्ल्युडिंग अ रिबेल लाईक … अॅण्ड कार्व्ह आउट हिज ओन पॉलिटिकल स्पेस अॅण्ड रिटेन
जब भूतपूर्व प्रधानमंत्री पी व्ही नरसिंह राव का देहांत हुआ तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए कांग्रेस मुख्यालय में तक नहीं लाने दिया।इसपर करारी टिप्पणी करते हुए शीर्ष नेतृत्व की घिनौनी मानसिकता व गिरी हुई राजनीती का दर्शन बारू अपने पाठकों को कराते हैं।
" नरसिंह राव'ज् चिल्ड्रेन वॉन्टेड द फॉर्मर पीएम टु बी क्रीमेटेड इन दिल्ली,लाईक अदर काँग्रेस प्राईम मिनिस्टर्स. इम्प्रेसिव्ह मेमोरियल्स हॅड बीन बिल्ट फॉर नेहरू ,इंदिरा अॅण्ड राजीव अॅट प्लेसेस व्हेअर दे हॅड बीन क्रीमेटेड… अहमद पटेल वॉन्टेड मी टु एन्करेज नरसिंह राव'ज् चिल्ड्रेन, टु टेक देअर फादर'स् बॉडी टू हैद्राबाद फॉर क्रीमेशन. … सोनिया डिड नॉट वॉन्ट अ मेमोरियल फॉर राव एनीव्हेअर इन दिल्ली.द काँग्रेस पार्टी रिफ्युज्ड टु अलॉव राव'ज् बॉडी टु बी ब्रॉट इन्टू द पार्टी'ज् हेडक्वार्टर ऑन इट्स वे टू एअरपोर्ट अॅण्ड सोनिया चोज नॉट टु बी प्रेझेन्ट अॅट द हैद्राबाद क्रीमेशन ," बारू लिखते हैं।
अर्थशास्त्र में अन्तर्राष्ट्रीय कीर्ति के विद्वान डॉ.मनमोहन सिंह सरकार में प्रधानमंत्री होने के बावजूद उन्हें न जाने कितनी बार अपमान सहना पड़ा।उन्होंने मुझफ्फर रझ्मी की पंक्तिया संसद में सुनायी थीं- मानो उन्हीं की कहानी सुना रही हों -"लम्हों ने ख़ता की थी,सदियों ने सज़ा पायी।" उनके सहयोगी मंत्रियों का उन्हें सहयोग मिलना तो दूर;उनके द्वारा किये गए घोटालों के ऊपर उन्हें आँखे मूँद कर,भ्रष्टाचार का मूक दर्शक बनना पड़ा।बारू द्वारा पूछने पर प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की प्रतिक्रिया थी ,"लेट देम टेक ऑल द क्रेडिट.आय डू नॉट नीड इट.आय अॅम ओन्ली डूइंग माय वर्क. आय डू नॉट वॉन्ट एनी मीडिया प्रोजेक्शन." डॉ.मनमोहन सिंह द्वारा किये गए अच्छे कार्योंका श्रेय गांधी परिवार को देने के लिए चाटुकार कांग्रेसी नेता तैयार ही थे। यदि २००९ के चुनावोंमे कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ता,तो वही चाटुकार कांग्रेसी नेता उस हार का ठीकरा डॉ.मनमोहन सिंह पर फोड़ते।
"If the Congress had lost,the blame for the defeat would have been placed squarely on the PM's shoulder....Now that the party was back in office,and that too with more numbers than anyone in the party had forecast,the credit would go to the party's 'first family.'To the scion and future leader.It was Rahul's victory,not Manmohan's."बारू लिखते हैं।
यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार व घोटालों के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हुए वे कोयला घोटाले पर सटीक टिप्पणी करते हैं।"The scandal relating to the allocation of coal blocks during the period when Dr. Manmohan Singh handled the coal portfolio further tarnished the prime minister's image.Here too, he was charged,not with corruption,but with turning a blind eye to the corruption of others."
इसी धागे को आगे बढ़ाते हुए "क्रूसेडर ऑर कॉन्स्पिरेटर ?कोलगेट अॅण्ड द अदर ट्रूथस" पुस्तक जिसमें पी सी पारख ने कोयला घोटाले का कच्चा चिट्ठा खोला है,प्रधानमंत्री के बारे में लिखते हैं,
"By continuing to head a government in which he had little political authority,his image has been seriously dented by 2G and Coalgate although he has had a spotless record of personal integrity."
"भारत की अर्थव्यवस्था एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर आ रही है,और कुछ विशेषज्ञोंका मानना है,कि सन २०५० में वह विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था होगी।बढ़ती अर्थव्यवस्था को अधिक ऊर्जा की जरुरत पड़ेगी।भारत की ऊर्जा की दो तिहाई जरुरत कोयला पूरी करता है।भविष्य में भी भारत में कोयला ही ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत होगा।कोयला-भण्डार तथा कोयला-उत्खनन को देखा जाए तो भारत विश्व में अग्रणी देशों में है।भारत में विपुल मात्रा में कोयला है।फिर भी कोयले की जितनी आवश्यकता है,उसकी आपूर्ति नहीं हो पाती।इसी के कारण कोयले में कालाबाज़ारी को बढ़ावा मिला है। कोयला माफिया सक्रिय हैं।कोल ब्लॉक आवंटन में पारदर्शिता का अभाव था।कोयला-उत्खनन व् उत्पादन के लिए पारदर्शिता के साथ नीलामी होना आवश्यक था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।फर्ज़ी कंपनिया बनाकर अपारदर्शिता के साथ उनको कोल ब्लॉक आवंटित कर दिए गए।कोल ब्लॉक आवंटन जब हुआ,तब कोयला मंत्रालय का कार्यभार प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने संभाला हुआ था।कोल ब्लॉक आवंटन में पारदर्शिता का अभाव होने की बात CAG -सीएजी की रिपोर्ट में आयी।रिपोर्ट के मुताबिक इससे सरकारी खजाने को 1 लाख 86,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा और फायदा निजी कंपनियों ने कमाया।
"The Comptroller and Auditor General of India-CAG ,Mr.Vinod Rai did an excellent job of bringing the huge coal allocation scandal into the public domain....The CAG observed that the Screening Committee did not follow a transparent and objective method....The CAG said that on account of abnormal delay of more than eight years in implementing a policy that the government itself had formulated,there was an undue financial gain of about 1.86 lakh crore to private parties.The gain was obviously at the cost of the exchequer... Open bidding for allocation of this resource was proposed way back in 2004.It does not require great intelligence to understand why it took over eight years to implement a transparent bidding system.The reason is simple and obvious:the entire political class of India was opposed to it."पारख लिखते हैं। उन्होंने पुस्तक में सभी कोयला मंत्रियों की काली करतूतोंपर विस्तारपूर्वक लिखा है।
कोयला घोटाले में प्रधानमंत्री पर आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया।परन्तु वास्तविकता में,डॉ.मनमोहन सिंह वॉज इन ऑफिस,बट ही वॉज नॉट इन पॉवर... ऐसा "द अॅक्सिडेन्टल प्राईम मिनिस्टर" पुस्तक में संजय बारू लिखते हैं।कई तथ्योंके साथ इस बात को उन्होंने साबित भी किया है।
"...I have come to terms with this.There cannot be two centres of power.I have to accept that the party president is the centre of power."ऐसा स्वयं डॉ.मनमोहन सिंह ने माना है। ऐसे में , कोयला घोटाले के पीछे असली चेहरा किसका है,यह साफ़ नजर आने लगता है।
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